स्वप्न मेरे: तन्हाई है ...

बुधवार, 19 सितंबर 2012

तन्हाई है ...


जो छाई है 
तन्हाई है 

घर की तुलसी 
मुरझाई है    

जो है टूटा  
अस्थाई है 

कल था पर्वत  
अब राई है 

अब शर्म नहीं  
चिकनाई है 

महका मौसम 
तू आई है 

दुल्हन देखो   
शरमाई है 

(गुरुदेव पंकज जी के सुझाव पे कुछ कमियों को दूर करने के बाद) 
  

84 टिप्‍पणियां:

  1. जो छाई है वह तन्हाई है ..हम्म सही ,,खूबसूरत

    जवाब देंहटाएं
  2. लो जी और छोटी हो गयी....अब क्या अगली बार एक ही शब्द मिलेगा :-)

    जवाब देंहटाएं
  3. क्या बात है ..अनोखा अंदाज .पसंद आया.

    जवाब देंहटाएं
  4. आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 22/09/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
  5. टूट गया जो
    अस्थाई है

    ...बहुत खूब!

    जवाब देंहटाएं
  6. बालों से टपकें बूँदें,
    लगता अभी नहाई है ।

    जवाब देंहटाएं
  7. बहुत बढ़िया !
    और अंत में ....
    नेताजी का
    लोभ तों देखो,
    यमराज
    खड़ा दर पर,
    फिर भी जोड़ता
    पाई-पाई है !

    जवाब देंहटाएं
  8. अजब गजब आपकी बातें सुन्दर ढंग से आपने लिख समझाई . बहुत खुबसूरत तरीका बुझाया आपने .

    जवाब देंहटाएं
  9. गजब यह तो
    भाई है ||
    सुन्दर प्रस्तुती भाई जी |
    बढ़िया भाव ||

    जवाब देंहटाएं
  10. महका मौसम
    तू आई है

    सुन्दर ..भावपूर्ण रचना.

    जवाब देंहटाएं
  11. अति सूक्षम बह्र
    मन भायी है .

    बेहतरीन प्रयोग .

    जवाब देंहटाएं
  12. महका मौसम
    तू आई है

    रात सुबह से
    शरमाई है ...सुन्दर अभिव्यक्ति.

    जवाब देंहटाएं
  13. महका मौसम
    तू आई है

    रात सुबह से
    शरमाई है
    vaah kya baat hai
    sundar .....

    जवाब देंहटाएं
  14. कम शब्दों में दिल के भावों को उजागर करती सार्थक एवं सुंदर रचना...

    जवाब देंहटाएं
  15. वाह...वाह...वाह.....

    एक दम नया नवेला प्रयोग.....
    बहुत बढ़िया रचना...
    सादर
    अनु

    जवाब देंहटाएं
  16. शर्म नहीं अब
    चिकनाई है

    महका मौसम
    तू आई है

    yah rachna aap ga ke dekhen achchha lagega.

    जवाब देंहटाएं
  17. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    सभी शब्दचित्र बहुत उम्दा हैं!
    गणेशचतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएँ!

    जवाब देंहटाएं
  18. कैक्टस पे निखार आई है ,
    कल रहा हाथ
    अब काही है .

    फंगस सबपे
    उग आई है .

    ये भारत देश
    मेरे भाई है .

    महंगाई ही ,
    महंगाई है .

    सेहरा में घटा ,
    कब आई है .

    कविता हमसे ,
    लिखवाई है ,
    ये अपने दिगंबर ,
    भाई हैं .
    कानों में होने वाले रोग संक्रमण का समाधान भी है काइरोप्रेक्टिक में
    कानों में होने वाले रोग संक्रमण का समाधान भी है काइरोप्रेक्टिक में http://kabirakhadabazarmein.blogspot.com/2012/09/blog-post_17.html

    जवाब देंहटाएं
  19. ..खुद में ही लिप्त...प्यारी सी कविता है

    जवाब देंहटाएं
  20. कौन गुनाह कर डाला रात ने शायर साहब! ?

    जवाब देंहटाएं
  21. बहुत सुंदर...छोटे छोटे भाव...!:)

    ~बरखा ने ये कैसी
    झड़ी लगाई है..
    चाँद ने भी देखो...
    छेड़ी लड़ाई है....~

    ~सादर!

    जवाब देंहटाएं
  22. महका मौसम
    तू आई है

    रात सुबह से
    शरमाई है
    bahut hi sunder
    kavita man par chhaii hai ...

    जवाब देंहटाएं
  23. घर की तुलसी
    मुरझाई है

    टूट गया जो
    अस्थाई है

    सच कहा आपने

    जवाब देंहटाएं
  24. जो छाई है
    तन्हाई है
    घर की तुलसी
    मुरझाई है
    ..सच यह आलम बड़ा दुःखदाई है ..
    ..बहुत बढ़िया रचना

    जवाब देंहटाएं
  25. बहुत बढ़िया सर जी...
    बेहतरीन रचना...
    :-)

    जवाब देंहटाएं
  26. आखिर में ....फिर तन्हाई है ???
    शुभकामनायें!

    जवाब देंहटाएं
  27. वाह बढ़िया सुन्दर और प्रभावी . कम शब्दों में समझाई .

    जवाब देंहटाएं
  28. ’अब शर्म नहीं चिकनाई है---’
    हर शब्द—अर्थ लिये हुए,बूंद में सागर.

    जवाब देंहटाएं
  29. JAADU BIKHER DIYA HAI AAPNE DIGAMBAR
    JI . MUBAARAQ .

    जवाब देंहटाएं
  30. तन्हाई है ...

    जो छाई है (जो छाई है ,ऍफ़ डी आई है )
    तन्हाई है

    घर की तुलसी
    मुरझाई है (बडकी बेटी, बिन ब्याही है )

    जो है टूटा
    अस्थाई है (भरोसा टूटा है सरकार का ,स्थाई है )

    कल था पर्वत (कल भी आज भी ,सिर्फ मंहगाई है )
    अब राई है

    अब शर्म नहीं
    चिकनाई है (अब शर्म नहीं ,कोयलाई है )

    महका मौसम
    तू आई है

    दुल्हन देखो
    शरमाई है

    जवाब देंहटाएं
  31. इतने छोटे छंदों में इतनी गहरी बातें...

    जवाब देंहटाएं
  32. छोटी बहर का अपना ही जादू है.
    "जो छाई है
    तन्हाई है"
    बहुत खूब लिखा है.

    जवाब देंहटाएं
  33. वाह!
    चंद शब्दों में कही बड़ी बातें !

    जवाब देंहटाएं
  34. छोटे बाहर की
    गज़ल खूब सजाई है ... बहुत खूब

    जवाब देंहटाएं
  35. काव्य की एक और विधा ...कुछ ख़ास नाम है इसका ?
    छाई वो तन्हाई
    पुरवाई घबराई !

    जवाब देंहटाएं
  36. जो छाई है
    तन्हाई है
    घर की तुलसी
    मुरझाई है

    छोटी छोटी खूबसूरत प्ंक्तियों में बडी बातें ।

    आप भी तो
    छा गये भाई हैं ।

    जवाब देंहटाएं
  37. बहुत ही बढ़िया । मेरे नए पोस्ट समय सरगम पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं
  38. रात सुबह से
    शरमाई है ...सुन्दर अभिव्यक्ति

    जवाब देंहटाएं
  39. कम शब्दों में सुन्दर रचना

    जवाब देंहटाएं
  40. नासबा जी
    छोटी बहार पर बहुत सही ग़ज़ल.... ये शेर खास पसंद आया
    महका मौसम
    तू आई है
    वाह वाह

    जवाब देंहटाएं
  41. आप तो छोटी बहर की ग़ज़ल में कमाल करते हैं। अद्भुत!

    जवाब देंहटाएं
  42. ये दौर बड़ा हरजाई है ,

    बेटियाँ यहाँ कुम्हलाई हैं ,


    मुस्टंडों की बन आई है ,

    सरकार नहीं परछाईं हैं .

    जवाब देंहटाएं
  43. अति सुन्दर रचना। साधारण शब्दों
    में असाधारण बात कह देना ही
    तो कविता है। कवि-धर्म बखूबी
    निभाया है।
    साधुवाद।

    आनन्द विश्वास।

    जवाब देंहटाएं
  44. बहुत दिनो बाद ब्लोग जगत में आया हू.

    आपकी छोटी बहर कि ग़जल पढके मजा आ गया

    बहुत खुबसुरत !

    जवाब देंहटाएं
  45. जो है टूटा
    अस्थाई है.!!
    so very true :)

    जवाब देंहटाएं
  46. क्या बात है दिगंबर जी दिल खुश हो गया आपकी इस रचना को पढ़ कर !

    जवाब देंहटाएं
  47. आपने शब्दों के माध्यम से जो भावों का खेल खेला है, वो सच में कमाल है। आपने तन्हाई, बदलाव और नए आने वाले मौसम की खुशबू को बड़ी संजीदगी और सुंदरता से उतारा है। ये पंक्तियाँ सरल हैं लेकिन भीतर बहुत कुछ कहती हैं। पढ़कर मन में हल्की मुस्कान भी आती है और थोड़ा सोचने पर मजबूर भी करती हैं।

    जवाब देंहटाएं

  48. Wählen Sie die passenden Schulungsbausteine für eine effektive cyber security weiterbildung. Überlegen Sie, welche Themenbereiche notwendig sind, um den Schutz kritischer Infrastrukturen zu gewährleisten. Dabei spielt die Kenntnis aktueller Standards wie ISO 27001 eine wichtige Rolle, da sie klare Rahmenbedingungen für Informationssicherheit bieten. Um gezielt auf Ihre Anforderungen einzugehen, empfiehlt es sich, csvisor in Betracht zu ziehen und individuelle Kurse auszuwählen. Die Auswahl sollte auch die aktuellen Bedrohungslagen berücksichtigen, etwa durch die Analyse von Angriffsmustern im Jahr 2023 oder durch Zertifizierungen wie CISSP. Entscheiden Sie sich für Bausteine, die praktische Anwendungen und Theorie verbinden, um das Gelernte sofort in der Praxis umzusetzen.

    जवाब देंहटाएं

आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है