स्वप्न मेरे: पर कर के वही काम दुबारा न करो तुम …

बुधवार, 6 मई 2026

पर कर के वही काम दुबारा न करो तुम …

बाज़ी ये कभी जीत के हारा न करो तुम.
शतरंज में प्यादों को उतारा न करो तुम.

है भूल अगर इश्क़ जो हम से, तो सितमगर,
भूले से भी ये भूल सुधारा न करो तुम.

सरगोशियाँ बस्ती की ये बदनाम करेंगी,
आवाज़ दे के हम को पुकारा न करो तुम.

जीवन के ये जो खेल हैं उत्सव से नहीं कम,
जीतो न अगर शर्त तो हारा न करो तुम.

जीने की जो आदत है जियो वक़्त को हर पल,
बेकार कभी वक़्त गुज़ारा न करो तुम.

ख़ुद ढूँढ के पीना जो समुंदर की तलब है,
नदिया को नमक डाल के खारा न करो तुम.

अब हो जो गया इश्क़ तो फिर क्या ही करोगे,
पर कर के वही काम दुबारा न करो तुम.

8 टिप्‍पणियां:

  1. वाह क्या ग़ज़ल है...👏👏👏

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  2.  आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में शनिवार 09 मई, 2026
    को लिंक की जाएगी ....  http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
      

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  3. बहुत ही प्यारी रचना हैं दिगंबर जी! बहुत ही रोचक और सरस शेरों से सजी हैं! हार्दिक शुभकामनायें आपको 🙏

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आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है