स्वप्न मेरे: शुक्रवार की अल्साई सुबह ...

शुक्रवार, 22 मार्च 2013

शुक्रवार की अल्साई सुबह ...


हमेशा की तरह 
शुक्रवार की अल्साई सुबह 
आज भी दुबई आई  

पर हर शुक्रवार की तरह 
बिस्तर के कोने में पड़ा मोबाइल उठाने की 
हिम्मत नहीं थी आज   

शायद लगने लगा था 
तू इस दुनिया में नहीं रही ...

फिर पता नहीं कब हाथ अपने आप चलने लगे 

जब जागा तो दूसरी ओर फोन की घंटी बज रही थी 

अवचेतन मन 
शायद समझ गया था 

तेरे बिस्तर के किनारे 
आज भी फोन की घंटी बजेगी 
कोई उठाये न उठाये 
तू तो माँ मुझसे जुडी रहेगी ... 

(दुबई में शुक्रवार के दिन छुट्टी होती है ... ओर हर शुक्रवार को माँ कहीं नहीं जाती थी सिर्फ मेरे फोन का इंतज़ार करती थी)

79 टिप्‍पणियां:

  1. स्मृति माँ की याद हमेशा बनी रहती है

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  2. बहुत सताती हैं यादें.......
    :-(

    सादर
    अनु

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  3. यादें होती ही कुछ ऐसी हैं और माँ की यादें .... निःशब्द हूँ कुछ कहने में. माँ की कमी कितनी खलती है उन्हें बयां करने हेतु कोई शब्द ही उत्पन्न नहीं हुआ है. माँ को नमन

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  6. जीवन में कई बातें ऐसी तयशुदा रहती हैं जैसे शुक्रवार को मां को फ़ोन करना...और यह एक फ़िक्सड प्रोग्रामिंग हो गई अवचेतन में...हम समझ सकते हैं कि कितनी पीडा होती है, मार्मिक पोस्ट.

    रामराम.

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  7. माँ से ऊँचा संसार में कोई नहीं | आभार

    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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  8. maa ko samarpit aapka ye kavya sansaar bahut sanzida to hai hi, khoobsoorat bhi hai...!

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  9. maa ko samarpit aapka ye kavya sansaar bahut sanzida to hai hi, khoobsoorat bhi hai...!

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  10. जाने वाले चले जाते हैं बस यादें रह जाती हैं.

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  11. माँ के सम्मान में जो कहें जितना कहें उतना ही कम

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  12. सही है, माँ न होकर और भी करीब हो जाती है..

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  13. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार (23-3-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
    सूचनार्थ!

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  14. माँ माँ ही होती है,और जब वह नहीं होती तो उसकी याद अनमना बना ही देती है.

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  15. माँ का स्नेह हमेशा अपने बच्चों के साथ बना रहता है,,,

    RecentPOST: रंगों के दोहे ,

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  16. "... ओर हर शुक्रवार को माँ कहीं नहीं जाती थी सिर्फ मेरे फोन का इंतज़ार करती थी"......
    सबकुछ यह लाइन कह गई !

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  17. :( ये यादें संबल बने..बस और क्या कहें.

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  18. सुन्दर प्रवाह..ईश्वर का रूप ही माँ है ..

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  19. सच में मार्मिक लगी पोस्ट....

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  20. सिग्नेचर टोन बनके आती हैं माँ की यादें .एक एहसास बना रहता है उसके होने का .शुरू के बरस ऐसा ही होता है एक एहसास फिर फिर मन को सालता है -माँ अब नहीं है .यादें तो ता -उम्र रहतीं हैं अपने वजूद में घुली मिली सी .शुक्रिया आपकी टिप्पणियों का .फाग मुबारक (- माँ ).

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  21. murt roop men maa ka nahi hona akharta hai ...par amurt roop men ma hamesha apne sath rahti hain .....yaadon aur aashirvad men ....par bahut yad aati hai unki

    ....

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  22. saare ahsaas padhe maine ma ke bare me aisa laga mano mere mn ki hi bat hai ...sach ma to ma hi hoti hai ..koi unki kami puri nahi kar pata hai...

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  23. बहुत ही मासूम सुकोमल भावनाओं से भरी माँ को समर्पित रचना दिल को छू गयी...

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  24. इसे कहते हैं गुगली.....आखिरी लाइन में सोच के विपरित .....पर एक अहसास ..जो प्यार का ही है.बस उसका रुप मां की ममता का।

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  25. शायद हर माँ ऐसी ही होती है , जब बच्चे दूर हों तो उनके फ़ोन इन्तजार में पूरे पूरे दिन बैठी रहती है. माँ वो चीज है जीवन में और सिर्फ एक बार मिलती है और फिर जाकर भी हमेशा साथ रहती है.

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  26. तेरे बिस्तर के किनारे
    आज भी फोन की घंटी बजेगी
    कोई उठाये न उठाये
    तू तो माँ मुझसे जुडी रहेगी ...

    ....माँ कहाँ दूर हो पाती है मन से...बहुत भावपूर्ण रचना..

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  27. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  28. आंखों में आंसू छलक आई! आपकी कलम में जादू है पाठक को हंसाने और रूलाने का।

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  29. आज की ब्लॉग बुलेटिन चटगांव विद्रोह के नायक - "मास्टर दा" - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  30. :(आप दुबई की बात कर रहे हैं कि वहाँ शुक्रवार को छुट्टी होती है इसलिए माँ उस दिन आपके फोन का इंतज़ार किया करती थी मगर सच तो यह है कि उनको तो हर पल हर दिन आपके फोन का इंतज़ार रहा करता होगा। क्यूंकि माँ तो एक दिन क्या कुछ घंटे भी यदि अपने बच्चे कि आवाज़ न सुने तो उसका मन बैचेन रहा करता है लेकिन आप बाहर हैं इसलिए बस मन समझा लिया करती होंगी वह.... यकीन मानिए आपके दिल कि आवाज आज भी उन तक पहुँचती होगी। इसलिए हर उन्हें मुस्कुराकर याद किया कीजिये।

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  31. माँ केवल स्थूल नहीं,सूक्ष्म रूप में उसकी व्याप्ति सदा रहती है.

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  32. यही तो माँ का निश्छल प्रेम है.

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  33. माँ अवचेतन मन पर भी छाई रहती है ... बहुत भावप्रवण रचना

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  34. maa kee smriti mein marmik bhaavpoorn kavita . bahut khoob !

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  35. बहुत ही सुन्दर पंक्तियाँ. माँ का साथ तो हमेशा ही रहना है. २३ गुण-सूत्र लिए..

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  36. बहुत ही सुन्दर पंक्तियाँ. माँ का साथ तो हमेशा ही रहना है. २३ गुण-सूत्र लिए..

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  37. माँ से जुडी यादों को भूलना आसान नही है.हर पल उनका अहसास रहता है चाहे जगे हों या नींद में.शुक्रवार की सुबह तो अपने लिए अलसाई ही होती है. बहुत ही सुन्दर भाव का अहसास.

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  38. बहुत ही मर्म स्पर्शी, शुक्रिया और बधाई .

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  39. जीवन में कोई भी रिक्तता भरने की चाह होती है तो माँ की याद आती है।

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  40. कल दिनांक 24/03/2013 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  41. माँ सशरीर नहीं है तो क्या ?हर पल तो साथ है मन के पास ।

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  42. आप वाकई अपनी माँ के बहुत करीब थे........खुदा उन्हें जन्नत में आला मकाम अता करे.....आमीन।

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  43. दिन कोई भी हो राह पथरीली या चिकनी माँ का हमेशा इंतजार रहता है

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  44. यादें होती ही कुछ ऐसी हैं ...जो दिल में हमेंशा रहतीं है ...

    पधारें "चाँद से करती हूँ बातें "

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  45. माँ बस एक आसरा ही बहुत है ज़िन्दगी के लिए ....

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  46. अवचेतन मन
    शायद समझ गया था

    तेरे बिस्तर के किनारे
    आज भी फोन की घंटी बजेगी
    कोई उठाये न उठाये
    तू तो माँ मुझसे जुडी रहेगी ...


    सच है , मां कभी अलग नहीं होती अपने बच्चों से ...
    ♥ मातृरूपेण आदरणीया प्रतिभा सक्सेना जी से पूर्णतः सहमत - माँ केवल स्थूल नहीं,सूक्ष्म रूप में उसकी व्याप्ति सदा रहती है

    आपकी ताज़ा ग़ज़ल का इंतज़ार है अब आदरणीय दिगंबर जी !
    :)
    आपको सपरिवार होली की बहुत बहुत बधाई !

    हार्दिक शुभकामनाओं मंगलकामनाओं सहित…

    -राजेन्द्र स्वर्णकार


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  47. vatan se dur yad hi jine ka sahara hoti hai saparivar holi ki shubhkamnaye,mubark ho........li

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  48. कुछ शब्दों में पूरी कायनात .... निश्चल प्रवाह ...

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  49. मित्र फोन करके देखो अब भी वो उठाएगी...माँ अमर होतीं हैं...अपने बच्चों के लिए...रुला गयी आपकी रचना...

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  50. ये यादें सौगात होती हैं बे -इंतिहा मिली तवज्जो की प्यार की .माँ की सोहबत उसका आँचल और आँचल की छाँव जीवन की सारी शीतलता लिए रहती है .

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  51. यादें उम्र भर साथ चलती हैं .....

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  52. भाई साहब आपकी टिप्पणियाँ लेखन की आंच बनके आती हैं शुक्रिया आपका -यादों के धुंधलके से आप माँ की याद ताज़ा करवाते रहतें हैं .फाग मुबारक(-माँ ).

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  53. bahut hi marmik rachana lagi ....sadar aabhar sir ...sath hi Holi pr hardik shubh kamnayen .

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  54. bahut sunder abhivyakti Holi ki subhkamnayen! mai aapko follow kar raha hun,sir. aap bhi mumujhe follow karen mujhe khushi hogi.

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  55. मां स्मृतियों में सदैव सप्राण रहती हैं।

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  56. माँ आज भी जुडी है स्मृतियों में अलग कहाँ है... होली की हार्दिक शुभकामनायें...

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  57. आप को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ!!

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  58. होली की बधाई स्वीकार करें... सुबह-सुबह

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  59. नासवा जी नमस्ते !!

    छोटी सी पंछी यही कहना चाहती है आपसे
    माँ का प्यार निस्वार्थ होता है
    तो इस प्यार के एहसास से हमेशा खुश रहिये

    और इस प्यार का रंग इस होली सब के साथ बाँटिये
    होली की बहुत बहुत मुबारक

    नई पोस्ट
    अब की होली
    मैं जोगन तेरी होली !!

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  60. माँ स्मृतियों में हमेशा रहेंगी . उन्हें साथ रहते आगे बढिए !
    बहुत शुभकामनायें !

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  61. माँ पर आपकी बहुत सी कवितायेँ हो गई दिगम्बर जी ...
    सभी बहुत अच्छी ...
    अच्छा लगा जानकार हर शुक्रवार आप माँ को फोन करते हैं ...
    यहाँ भारत में रहती है ...? कहाँ ...?

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  62. हर शब्द में तू हर साँस में तू अब दूर् है तू पर पास भी तू कैसे भूल जाऊँ तुझे माँ ,हर रचना दिल तक पहुँच रही है आपकी,मेरी ही गलती थी जो अब तक ना पढ़ी अब और भी पढ़ना चाहूँगी|

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  63. इन यादों के साये हर पल ... साथ रहते हैं
    मन को छूती पोस्‍ट
    सादर

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  64. फोन मिलाती रही लेकिन कुछ कारणों से बात ही नहीं हो पाई क्या पता था उस दिन के बाद फिर वो नंबर से कभी घंटी नहीं बजेगी ... बात करना चाहती थी अपनी बेटी से लेकिन वो भी नहीं हो पाई और काल चक्र में यूँ समां गयी की फिर कभी बात नहीं हो पायी .. आज तक अफ़सोस है की काश उस दिन फोन उठा लिया होता ....

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  65. आज तो आपके ब्लॉग से जाने का मन ही नहीं कर रहा है ..आज मैं आपके ब्लॉग के अलावा कुछ पढने की मंह स्थिति में हूँ भी नही....

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