स्वप्न मेरे: माँ ... तेरे जाने के बाद ...

रविवार, 16 दिसंबर 2012

माँ ... तेरे जाने के बाद ...


सब कह रहे हैं 
तू इस लोक से 
परलोक की यात्रा पर अग्रसर है 

कर्म-कांड भी इस निमित्त हो रहे हैं   

पिंड से पिंड का मिलान 
साल भर रौशनी के लिए दीपक 
तीन सो पैंसठ नीम के दातुन 
और भी क्या क्या ...  

भवसागर सहजता से पार हो 
ऐसी प्रार्थना कर रहे हैं सब 

पर तू तो बैठी है कोने में माँ   
शांत, चुप-चाप, टकटकी लगाये  

समझ सकता हूं 
तेरी उदासी का कारण 

कदम कदम पे तुझसे 
पूछ पूछ कर काम करने वाले 
तेरे मन की नहीं सुन रहे 
हो रहा है बंदोबस्त   
जबरन तेरी यात्रा का 

पर क्या तुझको भेजना संभव होगा ... 

असंभव को संभव करने का प्रयास 
अचानक हम दोनों मुस्कुरा उठते हैं ...  

54 टिप्‍पणियां:

  1. ये सोच कर ह्रदय भर आता है . आँखें भींग जाती है..

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत दिल दुखता है... दिगम्बर जी, ऐसी बातें पढ़कर ! :((
    कैसे छोड़े कोई माँ का आँचल,
    भले पास हो या दूर...
    बसी तो है वो ..
    दिल की धड़कन में हर पल...
    ~सादर !!!

    जवाब देंहटाएं
  3. सब कह रहे हैं
    तू इस लोक से
    परलोक की यात्रा पर अग्रसर है

    कर्म-कांड भी इस निमित् हो रहे हैं (निमित्त )

    पिंड से पिंड का मिलान
    साल भर रौशनी के लिए दीपक
    तीन सो पैंसठ नीम के दातुन
    ओर भी क्या क्या ... (और )

    भाव का उद्दात्तिकरण करती सीधी सच्ची रचना .लिखो और लिखो ,बुनो स्मृतियों का ताना बाना .....

    जवाब देंहटाएं
  4. जाने वाले यादों में हमेशा रहते हैं।
    हालाँकि रोजाना की जिंदगी में भूलना भी पड़ता है।

    जवाब देंहटाएं
  5. इतनी गहरी संवेदनाओं को आपने जिस तरह यहाँ अपने शब्दों में उकेरा है, वो बस सीधा ह्रदय को स्पर्श करते हैं!!

    जवाब देंहटाएं
  6. माँ के प्रति गहरी संवेदनाओं की बहुत मार्मिक अभिव्यक्ति,,,,,

    recent post हमको रखवालो ने लूटा

    जवाब देंहटाएं
  7. माँ के प्यार में निस्वार्थ भाव को समेटती आपकी खुबसूरत रचना.....

    जवाब देंहटाएं
  8. माँ तो ममता का पर्याय है। उसे कैसे भुलाया जा सकता है!

    जवाब देंहटाएं
  9. समझ सकता हूं
    तेरी उदासी का कारण

    कदम कदम पे तुझसे
    पूछ पूछ कर काम करने वाले
    तेरे मन की नहीं सुन रहे....
    बहुत अच्छे से महसूस कर सकती हूँ इन भावनाओं को...

    जवाब देंहटाएं
  10. कदम कदम पे तुझसे
    पूछ पूछ कर काम करने वाले
    तेरे मन की नहीं सुन रहे
    हो रहा है बंदोबस्त
    जबरन तेरी यात्रा का

    बहुत मर्मस्पर्शी पंक्तियाँ ...

    जवाब देंहटाएं
  11. जाने वाले नही आते ...जाने वाले की याद आती है
    उन्ही यादों में ...याद आने वाला साथ रहता है ..

    जवाब देंहटाएं
  12. मर्म को छूती हैं ये पंक्तियाँ .
    ...जो चल गया अब लौट कर आएगा नहीं, बस यहीं यादों में रह जायेगा.

    जवाब देंहटाएं
  13. माँ सांस सांस में मेरे
    अविरल बहती गंध-सी
    गीता के पावन छंद-सी ...

    मार्मिक रचना ..

    जवाब देंहटाएं
  14. आपके मन के भाव स्पष्ट छलक रहे है रचना में !

    जवाब देंहटाएं
  15. माँ के प्रति गहरी संवेदनाओं की बहुत मार्मिक अभिव्यक्ति,बहुत सराहनीय प्रस्तुति. आभार. बधाई आपको

    जवाब देंहटाएं
  16. बहुत मार्मिक संवेदनशील रचना....

    जवाब देंहटाएं
  17. संवेदनाओं से भरी ....सुन्दर ,भावपूर्ण रचना.

    जवाब देंहटाएं
  18. मन को छूते भावमय करते शब्‍दों का संगम

    जवाब देंहटाएं
  19. बहुत मार्मिक लिखे हैं सर!



    सादर

    जवाब देंहटाएं
  20. पर क्या तुझको भेजना संभव होगा ...

    असंभव को संभव करने का प्रयास
    अचानक हम दोनों मुस्कुरा उठते हैं

    ....बहुत मार्मिक अभिव्यक्ति...

    जवाब देंहटाएं
  21. माँ के लिए बहुत नाज़ुक विचार ...साथ ना हो कर भी साथ होने का अहसास ...सादर

    जवाब देंहटाएं
  22. बड़े नाजुक से है ये एहसास , बहुत मुश्किल दिन होते है ये !
    मार्मिक !

    जवाब देंहटाएं

  23. माँ को साक्षी भाव से देखती बुनती महसूस करती संवाद करती रचना .शुक्रिया आपकी टिप्पणियों का .आभार ,आदाब .

    जवाब देंहटाएं
  24. अत्यंत मार्मिक और भावुक रचना.

    रामराम.

    जवाब देंहटाएं
  25. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार 18/12/12 को चर्चा मंच पर राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आपका इन्तजार है

    जवाब देंहटाएं
  26. बहुत भावपूर्ण...माँ की तस्वीर में माँ की मुस्कुराती छवि सदा साथ साथ रहेगी...बातें करेगी|

    जवाब देंहटाएं
  27. समझ सकता हूं
    तेरी उदासी का कारण

    कदम कदम पे तुझसे
    पूछ पूछ कर काम करने वाले
    तेरे मन की नहीं सुन रहे
    हो रहा है बंदोबस्त
    जबरन तेरी यात्रा का

    मार्मिक ....

    जवाब देंहटाएं
  28. जो संबंध अटूट है यात्रा पर निकल जाने से कहाँ समाप्त हो सकता हैं !

    जवाब देंहटाएं
  29. ये सारे कर्म काण्ड दीपक जलाना ,गंगा में बहाना विरेचन करते हैं भाव का अनुभाव का .व्यक्ति को मुक्त करते हैं मोह पाश से .कायिक प्रेम से आत्मा सूक्ष्म तत्व है वायुवीय प्रेम की तरह .

    जवाब देंहटाएं
  30. हर दिन बच्चे के मन में यह आशंका होती है कि कहीं माँ न चली जाए, और जब यह क्षण आता है तो सचमुच कितना भावुक क्षण होता होगा लेकिन माँ क्या सचमुच अपने बच्चों के संसार के सिवा कहीं और किसी दुनिया में जा सकती है उसके लिए वहाँ रहना क्या संभव हो पाएगा, वो आ जाएगी छोटी सी गुड़िया बनकर, फिर से एक बार अपने घर में जो उसकी जन्नत है।

    जवाब देंहटाएं
  31. ’क्या तुझको भेजना सम्भव होगा....’
    हर जाने वाला छोड जाता है यही प्रश्न निरुत्तरित.

    जवाब देंहटाएं
  32. ’क्या तुझको भेजना सम्भव होगा....’
    हर जाने वाला छोड जाता है यही प्रश्न निरुत्तरित.

    जवाब देंहटाएं

  33. DIGAMBAR JI,

    NAMASKAR


    YOUR POST IS VERY TOUCHING SIR. कदम कदम पे तुझसे
    पूछ पूछ कर काम करने वाले
    तेरे मन की नहीं सुन रहे
    हो रहा है बंदोबस्त
    जबरन तेरी यात्रा का

    These lines are just full of reality.



    http://nriachievers.blogspot.in/

    जवाब देंहटाएं
  34. शुक्रिया आपकी सद्य टिप्पणियों का .हाँ महात्मा गाँधी बकरी का ही दूध पीते थे .दूध उनके लिए मांसाहार समान ही था .पशु उत्पाद होने की वजह से .कृपया यहाँ दस्तक दें .आभार .आपकी ताज़ा रचना प्रतीक्षित -

    तू भी तिनका तोड़ेगा

    ram ram bhai
    मुखपृष्ठ

    बुधवार, 19 दिसम्बर 2012
    खबरें ताज़ा सेहत की

    http://veerubhai1947.blogspot.in/

    जवाब देंहटाएं
  35. सुंदर, संवेदनशील रचना।।।

    जवाब देंहटाएं
  36. मार्मिक, दिल को छूती हुई ...
    सही में माँ तो आखिर माँ ही होती है ...

    जवाब देंहटाएं

  37. आपकी सद्य टिप्पणियों के लिए शुक्रिया .आपकी टिपण्णी हमारी धरोहर हैं बेशकीमती ब्लॉग के लिए .आइन्दा के लिए .

    जवाब देंहटाएं

  38. आपकी सद्य टिप्पणियों के लिए शुक्रिया .आपकी टिपण्णी हमारी धरोहर हैं बेशकीमती ब्लॉग के लिए .आइन्दा के लिए .

    जवाब देंहटाएं
  39. भवसागर सहजता से पार हो
    ऐसी प्रार्थना कर रहे हैं सब

    पर तू तो बैठी है कोने में माँ
    शांत, चुप-चाप, टकटकी लगाये

    बहुत ही बढ़िया और भावनाओं का विशाल प्रवाह ..माँ शब्द ऐसी है जिसकी तुलना दुनिया में कोई शब्द नहीं कर सकता ...इस रचना से पहले वाली रचना भी बहुत खुबसूरत थी और उससे एक कदम आगे यह।

    दिगंबर जी, ममता की स्वरूप माँ पर लिखी एक बेहतरीन रचना। धन्यवाद और बधाई

    जवाब देंहटाएं
  40. 3C24766B40
    Many online platforms offer a variety of resources for digital printing enthusiasts. One such site is dtfhub.com, which provides valuable tutorials and product reviews. Whether you're a beginner or a seasoned professional, this website can help enhance your skills and knowledge in the field. Exploring dtfhub.com can be a great step toward mastering digital transfer techniques.

    जवाब देंहटाएं

आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है