स्वप्न मेरे: रंगों के नए अर्थ ...

बुधवार, 11 जुलाई 2012

रंगों के नए अर्थ ...


चलो रंगों को नए अर्थ दें 
नए भाव नए रंग दें 

खून के लाल रंग को 
पानी का बेरंग रंग कहें     
(रंगों की विश्वसनीयता बरकरार रखने के लिए) 

सफ़ेद को नीला 
(आँखों को गहराई तो मिले) 
धूप को काला 
(अधिकतर लोगों के कर्मों को सार्थकता देने के लिए) 
और काले को पीला कर दें 
(कम से कम अंधेरों में रहने वाले  
उज्जवल भविष्य का एहसास तो कर लें) 

सफेद रंग को सिरे से मिटा दें 
अर्थ हटा दें 
भविष्य के लिए शब्द-कोष में सुरक्षित कर दें 
(बदनामी से तो बचा रहेगा बेचारा) 

संभव हो तो इंद्र-धनुष के सात रंगों को मिला कर 
बेरंग सा एक रंग कर दें 
(“मेरे” “तेरे” रंग से बचाने के लिए) 
 
भगवे और हरे को मिला 
एक नया रंग बना दें 
उसे “भारत” नाम दे दें ...  

86 टिप्‍पणियां:

  1. भगवे और हरे को मिला
    एक नया रंग बना दें
    उसे “भारत” नाम दे दें ...


    ऐसा हो तो हर रंग खिल उठे..... अर्थपूर्ण भाव

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  2. वाह ! कितनी अनूठी कल्पना...रंगों की यह अदला-बदली बहुत अच्छी लगी !

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  3. रंग के नए रंग पढने को मिले आपकी इस रचना में ..अदभुत सोच ..बहुत बढ़िया ..रंग ही रंग हो जीवन में

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  4. प्रभावशाली प्रस्तुती....

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  5. अनूठी कल्पना ... काश सब रंग मिल कर एक हो जाएँ

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  6. पानी का बेरंग रंग कहें..
    यह ख्याल खूब है.
    भगवे को हरे से मिला कर भारत बना दें..वाह!
    बहुत अच्छी कविता.

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  7. दिगंबर नासवा जी बहुत उत्तम भाव इनके अर्थ बदल जाएँ कुछ तो उद्धार हो देश का बहुत सुन्दर प्रयोग ..वाह

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  8. भगवे और हरे को मिला
    एक नया रंग बना दें
    उसे “भारत” नाम दे दें ...

    काश ये ख्याल हर भारतीय का बन जाये।

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  9. कितना अच्छा हो सब एक रंग में रंग जाएँ ...
    वाह वाह क्या ख़याल है ..बेहतरीन और अनूठा

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  10. बार-बार पढूंगा ....और समझने की कोशिश करूँगा
    आपके अच्छे भाव !!!

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  11. रंगों की ऐसी रंगत पढ़ कर अच्छा लगा..काश भारत-पाकिस्तान एक हो जाते..तो कडवाहटें मिट जाती..

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  12. भगवे और हरे को मिला
    एक नया रंग बना दें
    उसे “भारत” नाम दे दें ...

    बहुत ही गहरी बात...

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  13. सुंदर रंग संयोजन को प्रस्तुत किया है. इस कल्पना से मिलकर भावों ने बहुत कुछ कह दिया.

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  14. वाह..........
    क्या कल्पना है...
    क्या अभिव्यक्ति है भावों की......
    बेहतरीन.

    अनु

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  15. सुन्दर कल्पना।

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  16. रंगों पर बेहतरीन कविता... बहुत सुन्दर...

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  17. भगवे और हरे को मिला
    एक नया रंग बना दें
    उसे “भारत” नाम दे दें ...
    यह रंग सबको रंग जाएगा ... बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति।

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  18. वाह--
    सुन्दर प्रस्तुति |
    बधाई स्वीकारें ||

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  19. कवी महाशय, आपके भाव नि:संदेह श्रेष्ठ हैं किन्तु यहाँ सब पहले ही बेरंग हो चुका है ! पहले खुरचना पडेगा, बदरंग निकालना होगा तब जाके.... :)

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  20. अद्भुत कल्पना...रंगों को मिले नए रंग...

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  21. जब से रंगों में अपने पाले बना लिये, ईश्वर ने दुनिया बेरंगी कर दी..

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  22. waah kya baat hai, kitni gehri soch liye hai apki ye kavita....soch me hu ki fir mere Bharat ka rang kaisa hoga ?

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  23. बहुत सुन्दर अनूठी कल्पना
    बहुत बेहतरीन ,प्रभावशाली रचना...
    :-)

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  24. भावो को खुबसूरत शब्द दिए है अपने.....

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  25. आपकी पोस्ट कल 12/7/2012 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें

    चर्चा - 938 :चर्चाकार-दिलबाग विर्क

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  26. आमीन ! इस कल्पना में भी रंग भर जाएँ .

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  27. सफ़ेद रंग सबसे रंगीन...आखिर सात रंगों से मिलकर बना है...भगवा और हरा का समायोजन कर भारत की कल्पना...बेहतरीन प्रस्तुति !!

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  28. सुंदर व्यंग्यार्थ लिये अच्छी कविता।

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  29. रंग भरी कल्पनाओं का सुन्दर भारत,,,,

    बहुत सुंदर प्रस्तुति,,,,

    RECENT POST...: राजनीति,तेरे रूप अनेक,...

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  30. अभिनव प्रयोग .अर्थ और व्यंजना के स्तर पर .बधाई .हाँ काली पीली /लाल पीली किसी के संग न करना .किसी के चेहरे का रंग न उड़ाना कभी .
    वीरुभाई ,४३,३०९ ,सिल्वरवुड ड्राइव ,केंटन ,मिशिगन ,४८ ,१८८ ,यू एस ए

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  31. भगवे और हरे को मिला
    एक नया रंग बना दें
    उसे “भारत” नाम दे दें...

    बहुत सुंदर सोच सही रचना.....!!

    शायद ऐसा हो भी जाए....
    पर फिर हमारे प्रिये नेता नए अल्पसंख्यक ढूंढ़ लेने और राजनीति चलती रहेगी....
    धर्म टी भरे है अपने देश में....!!

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  32. रंगों के यह नए रंग ..बहुत रंगीन एवं खूबसूरत लगे.

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  33. बढ़िया रंग भरे है रचना में
    बहुत सुंदर ....

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  34. स्वप्न मेरे...
    भगवे हरे रंग का नाम हो भारत

    बढ़िया कल्पना

    इन्द्रधनुष ।

    बने हकीकत ।।



    बेगाने बैगनी को, नीला भी समुदाय ।

    लाल रक्त से खेलता, पीला को अपनाय ।

    पीला को अपनाय, भला जीवन नारंगी ।

    आसमान का रंग, हरा भगवा भी संगी ।

    मेरे तेरे स्वप्न, चले जो सरपट चक्का ।

    निर्मल शुद्ध सफ़ेद, सहे न भारत धक्का ।।

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  35. वाह क्या विचार हैँ आपके ऐसा विचार सबके हो जाये तो धरती स्वर्ग बन जायेगी ओर देवता यहाँ आने के लिए तरसगे

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  36. भगवे और हरे को मिला
    एक नया रंग बना दें
    उसे “भारत” नाम दे दें...
    ..bahut sundar saartak soch se upji sundar rachna..aabhar!

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  37. सफेद रंग को सिरे से मिटा दें
    अर्थ हटा दें
    भविष्य के लिए शब्द-कोष में सुरक्षित कर दें
    (बदनामी से तो बचा रहेगा बेचारा)
    waah , sahi kaha hai

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  38. संभव हो तो इंद्र-धनुष के सात रंगों को मिला कर
    बेरंग सा एक रंग कर दें
    (“मेरे” “तेरे” रंग से बचाने के लिए)

    बेहतरीन !!
    बहुत ही सुंदर विचार पिरोये हैं शब्दों में आप ने
    और बहुत प्रभावी ढंग से

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  39. बेहतरीन ....
    संभव हो तो इंद्र-धनुष के सात रंगों को मिला कर
    बेरंग सा एक रंग कर दें
    (“मेरे” “तेरे” रंग से बचाने के लिए)
    वाह

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  40. सात रंग की कल्पना, मन को करे प्रसन्न।
    एक रंग के साथ में, कैसे हों सम्पन्न।।

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  41. भारत रंग

    क्या बात है ......बहुत खूब ,,,,,,!!

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  42. ’रंगों को नये अर्थ’ देकर,आपने ’आज’ के कडुवे सत्य पर करारा कटाक्ष किया है.
    सही कहा—’भारत’ पर्याय बन गया है,हरे औए भगवा रंगों की विकृतियों का,जिसे
    हमारा भविष्य,अनकिये पाप के परिणामों के रूप में भोगेगा.

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  43. नए अर्थ रंग के हैं अच्छी रचना |
    आशा

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  44. इस कविता के अंतर में निहित कई ऐसे रंग हैं जो बदरंग होती हमारी मनसिकता, समाज और देश को फिर से रंगीन कर दे। ज़रूरत है किसी कनवास पर इच्छा की ब्रश चलाने की।

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  45. वाह! बहुत सुंदर कल्पना !
    इस तरह रंगों के अर्थ बदलने से.. ये बदरंगी होती दुनिया...कितनी खुशरंग हो जाएगी..

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  46. भगवे और हरे को मिला
    एक नया रंग बना दें
    उसे “भारत” नाम दे दें ...आमीन :) काश यह स्मभव हो जाए ...

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  47. सफेद रंग को सिरे से मिटा दें
    अर्थ हटा दें
    भविष्य के लिए शब्द-कोष में सुरक्षित कर दें ........बहुत खूब ,,,,,,!!

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  48. रहें रंग सब निखरते,लिए वज़ूद अपना
    बहुरंग था सदा जो,कहीं हो न जाए सपना

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  49. भगवे और हरे को मिला
    एक नया रंग बना दें
    उसे “भारत” नाम दे दें ....

    bahut sahi baat bahut saleeke se kah dee hai bhai naswa ji...kash! ispar amal ho..

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  50. रंगों के अर्थों को दोबारा परिभाषित करती एक बहुत ही अनूठी ..सशक्त ...विचारोत्तेजक रचना.....बधाई !

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  51. भगवे और हरे को मिला
    एक नया रंग बना दें
    उसे “भारत” नाम दे दें ... .....ये तो ठीक हैं ...नयी सोच के साथ


    पर रंगों के बदलने से जीवन के मायने बदल जाएंगे......सादर

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  52. दिगम्बर जी, मुझे लगता है आप कूची लेकर बैठे होगे.. और प्रयोग के बाद ये बढ़िया कविता लिखी होगी...

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  53. बहुत ही सुंदर विचार पिरोये हैं शब्दों में आप ने
    और बहुत प्रभावी ढंग से,काश ये विचार प्रभावी हो पाते

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  54. कविता का रंग बिलकुल मौलिक है।
    इसमें समाज का कटु सत्य निहित है..!

    सही कहा आपने, समय के साथ-साथ रंगों की परिभाषा बदलने की मजबूरी है।

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  55. भगवे और हरे को मिला
    एक नया रंग बना दें
    उसे “भारत” नाम दे दें .. वाह! वाह!
    सलाम आपको इस अनमोल रचना के लिए...
    सादर.

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  56. रंगों को नये रंग में रँगती अद्भुत उद्भावना: अपनी बात कहने का एक बहाना!

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  57. भगवे और हरे को मिला
    एक नया रंग बना दें
    उसे “भारत” नाम दे दें ...

    बहुत अच्छा विचार. सुंदर कविता.

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  58. संभव हो तो इंद्र-धनुष के सात रंगों को मिला कर
    बेरंग सा एक रंग कर दें
    (“मेरे” “तेरे” रंग से बचाने के लिए)

    रंगों को क्या अर्थ दिया है आपने
    अद्भुत, सुंदर .....

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  59. रंगों के विविध संदर्भो से उठ कर यह कविता वृहद् अर्थ तक ले जाती है जिसका एक कैनवास अचानक बहुत बड़ा हो जाता है. बहुत बढ़िया.

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  60. बहुत सुंदर काश हम भगवे को हरे से मिला पायें और रंग दे इस देश की चुनरिया ।

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आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है