स्वप्न मेरे: ख़ामोशी की जंग ...

मंगलवार, 3 जुलाई 2012

ख़ामोशी की जंग ...


कितनी लंबी है खामोशी की जंग
   
इंच भर दूरी तय करने को
मीलों लंबा सफर
आँखों से कुछ ना कहने का अनवरत प्रयास    
जबरन होठ बंद रखने की जद्दोजहद

और कितनी छोटी है जिंदगी की कशमकश

वक्त के साथ उतर जाता है
चुप होठों के पीछे छुपे बेताब शब्दों का सैलाब 
छोड़ जाता है अपने पीछे
कभी न खत्म होने वाला सन्नाटा

ऐसे में कभी कभी उम्र भर का सफर काफी नहीं होता
खामोशी को ज़ुबान देने में  

80 टिप्‍पणियां:

  1. उनसे आया न गया
    हमसे बुलाया न गया ....
    ख़ामोशी का लम्बा सफ़र
    हम दोनों से मिटाया न गया |

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  2. वाकई.....
    एक उम्र बीत जाती है...और लब बस फडफडा कर रह जाते हैं....

    बहुत सुन्दर सर...

    अनु

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  3. ऐसे में कभी कभी उम्र भर का सफर काफी नहीं होता
    खामोशी को ज़ुबान देने में

    बहुत सही कहा है .... एक उम्र बीत जाती है .... गहन प्रस्तुति

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  4. सचमुच कभी कभी उम्र भर का सफर काफी नहीं होता खामोशी को ज़ुबान देने में फिर भी ख़त्म नहीं होती ख़ामोशी की जंग... गहन भाव...

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  5. ऐसे में कभी कभी उम्र भर का सफर काफी नहीं होता
    खामोशी को ज़ुबान देने में .....सही कहा बहुत गहन सोच..

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  6. आज का मूड अलग है....सोचने से भी कई बार हम सीखते हैं !

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  7. बिल्‍कुल सच कहा है आपने ...
    कल 04/07/2012 को आपकी इस पोस्‍ट को नयी पुरानी हलचल पर लिंक किया जा रहा हैं.

    आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!


    '' जुलाई का महीना ''

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  8. वक्त के साथ उतर जाता है
    चुप होठों के पीछे छुपे बेताब शब्दों का सैलाब
    छोड़ जाता है अपने पीछे
    कभी न खत्म होने वाला सन्नाटा बहुत खूब ..और यह सन्नाटा दिल में बस जाता है ...

    जवाब देंहटाएं
  9. ऐसे में कभी कभी उम्र भर का सफर काफी नहीं होता
    खामोशी को ज़ुबान देने में.....वाकई बहुत सुन्दर ! आभार

    जवाब देंहटाएं
  10. ऐसे में कभी कभी उम्र भर का सफर काफी नहीं होता
    खामोशी को ज़ुबान देने में.....वाकई बहुत सुन्दर ! आभार

    जवाब देंहटाएं
  11. वक्त के साथ उतर जाता है
    चुप होठों के पीछे छुपे बेताब शब्दों का सैलाब
    छोड़ जाता है अपने पीछे
    कभी न खत्म होने वाला सन्नाटा

    ....लाज़वाब! बहुत गहन अभिव्यक्ति....

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  12. वाकई उम्र कहाँ पूरी पड़ती है.
    बहुत बढ़िया.

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  13. वक्त के साथ उतर जाता है
    चुप होठों के पीछे छुपे बेताब शब्दों का सैलाब
    छोड़ जाता है अपने पीछे
    कभी न खत्म होने वाला सन्नाटा

    यक़ीनन यही सत्य है .....!

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  14. ऐसे में कभी कभी उम्र भर का सफर काफी नहीं होता
    खामोशी को ज़ुबान देने में ………………खामोशी को कब जुबाँ मिली है …………वो तो हमेशा अश्कों मे ढली है………

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  15. इंच भर दूरी तय करने को
    मीलों लंबा सफर
    आँखों से कुछ ना कहने का अनवरत प्रयास
    जबरन होठ बंद रखने की जद्दोजहद

    और कितनी छोटी है जिंदगी की कशमकश
    Heart felt emotions. touching to heart. very nice!

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  16. उत्कृष्ट प्रस्तुति ।।



    इस प्रविष्टी की चर्चा बुधवार के चर्चा मंच पर भी होगी !

    सूचनार्थ!

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  17. बात तो सही है,,,
    बहुत उम्दा अभिव्यक्ति,,,

    MY RECENT POST...:चाय....

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  18. khaamoshee???????// सब से पहले तो बहुत दिनो के बाद आने के लिये क्षमा चाहती हूँ। आप हमेशा इतना अद्भुत कैसे लिख लेते हैं? सच मे खामोशी अपने आप मे अथाह सागर सी होती है। अगर किनारे टूट जायें तो सुनामी ही आती है।

    ऐसे में कभी कभी उम्र भर का सफर काफी नहीं होता
    खामोशी को ज़ुबान देने में
    सही बात है। शुभकामनायें।

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  19. जिंदगी तो वैसे भी छोटी ही लगती है . इसमें मन मुटाव के लिए जगह ही कहाँ है .
    बढ़िया चिंतन .

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  20. aahh! kya kahun ye hi nikla padhkar ..dil se, touching write.
    best wishes

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  21. छोड़ जाता है अपने निशाँ जो वक्त के साथ भी जस के तस रहतें हैं .बढ़िया प्रस्तुति है .

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  22. वक्त के साथ उतर जाता है
    चुप होठों के पीछे छुपे बेताब शब्दों का सैलाब

    कितना सच...

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  23. बहुत उम्दा अभिव्यक्ति....सही बात
    गुरुपूर्णिमा के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाए !

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  24. क्या कहने...
    गहन भाव लिए..
    ह्रदय द्रवित करती रचना...
    कितना दुखद अनुभव है...
    जब कुछ चाहकर भी ना कह पाए ये मन..
    खामोश रह जाये लब...
    :-)

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  25. ऐसे में कभी कभी उम्र भर का सफर काफी नहीं होता
    खामोशी को ज़ुबान देने में
    sahi kaha hai sundar rachna ....

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  26. पर ख़ामोशी की आवाज़ बहुत दूर तक जाती है और देर तक गूंजती है।

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  27. ख़ामोशी बहुत गहन होती है -जिसे सहन करना कठिन लगता है .

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  28. कई बार पूरी उम्र कम होती है ख़ामोशी को जुबां देने में ....
    सच में !

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  29. मौन की आवृत्तियाँ हमारी समझ से परे हैं।

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  30. मौन से जंग आसान नहीं

    क्योंकि ख़ामोशी जो कुछ कह जाती है उसका प्रतिउत्तर कहाँ

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  31. sach kaha kabhi to maun ko tootne me umr lag jati hai jisse rishton k roop badal jate hain. aur kayi baar maun hi itna kuchh samjha deta hai ki kuchh kahne ki jaroorat mehsoos nahi hoti.

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  32. कितनी लंबी है खामोशी की जंग
    और कितनी छोटी है जिंदगी की कशमकश
    ऐसे में कभी कभी उम्र भर का सफर काफी नहीं होता
    खामोशी को ज़ुबान देने में ... सच है

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  33. ख़ामोशी को शब्द मिल जाये तो ऐसी ग़ज़ल बनती है.

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  34. बहुत ही खुबसूरत ।

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  35. ऐसे में कभी कभी उम्र भर का सफर काफी नहीं होता
    खामोशी को ज़ुबान देने में

    सही में काफी लम्बी होती है कभी कभी खामोशी की जंग
    सुंदर प्रस्तुति !!

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  36. इंच भर दूरी तय करने को
    मीलों लंबा सफर. बहुत सुन्दर.

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  37. ’इंच भर दूरी तय करने का
    मीलों लंबा सफ़र----’
    सबके समक्ष,उक्त पंक्तियां प्रश्न चिन्ह खडा कर देती हैं.
    हर ओर,पथरीला सन्नाटा---और चटकती शिलाओं पर,घायल तलुवे—
    आखिर जाना कहां है.

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  38. खामोशी की जंग जीतना आसान नहीं होता...जुबाँ पे बात न आए तो निदान हो भी कैसे !!!

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  39. और ख़ामोशी के खिलाफ भी जंग लड़ी जानी आवश्यक है।....... मन की गहराइयों तक गए शब्द। आभार !!

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  40. वक्त के साथ उतर जाता है
    चुप होठों के पीछे छुपे बेताब शब्दों का सैलाब
    छोड़ जाता है अपने पीछे
    कभी न खत्म होने वाला सन्नाटा.

    आज मूड काफी ग़मगीन लगता है. दिल की बहुत गहराईयों से निकली है यह रचना.

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  41. बढ़िया अभिव्यक्ति...
    बधाई !

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  42. वक्त के साथ उतर जाता है
    चुप होठों के पीछे छुपे बेताब शब्दों का सैलाब
    छोड़ जाता है अपने पीछे
    कभी न खत्म होने वाला सन्नाटा ,.........waah bahut sundar sach kaha aapne sannata kbhi katm nahi hota apitu bahut kuch lil jata hai

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  43. वाह ... बेहतरीन भाव पिरोया है खामोशी में...सैलाब खुद में खींचता हुआ..

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  44. वक्त के साथ उतर जाता है
    चुप होठों के पीछे छुपे बेताब शब्दों का सैलाब
    छोड़ जाता है अपने पीछे
    कभी न खत्म होने वाला सन्नाटा

    .................................

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  45. khubsurat rachna......kahne na kahne ki zaddozahad me zindgi beet jati h

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  46. बहुत सुन्दर यह सौन्दर्य मयी ख़ामोशी !

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  47. बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति। मेरे पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद।

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  48. अद्भुत!! वाह- क्या बात है!!

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  49. वक्त के साथ उतर जाता है
    चुप होठों के पीछे छुपे बेताब शब्दों का सैलाब
    छोड़ जाता है अपने पीछे
    कभी न खत्म होने वाला सन्नाटा

    सच कहा आपने ख़ामोशी कभी न कभी टूटती जरुर है .. लेकिन एक सन्नाटा दिल के कोने में पैठ बनाये रखता है ..
    बहुत बढ़िया चिंतन मनन कराती रचना ..

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  50. वक्त के साथ उतर जाता है
    चुप होठों के पीछे छुपे बेताब शब्दों का सैलाब
    छोड़ जाता है अपने पीछे
    कभी न खत्म होने वाला सन्नाटा ......बहुत ही गहन अभिव्यक्ति ....

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  51. ऐसे में कभी कभी उम्र भर का सफर काफी नहीं होता
    खामोशी को ज़ुबान देने में

    .....लाज़वाब पंक्तियाँ...बहुत सुन्दर

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  52. और कितनी छोटी है जिंदगी की कशमकश
    भावों को जुबां देने के लिए जीवन एक कम होता है

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  53. ये मेरी उम्र मोहब्बत के लिए थोड़ी है ...

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  54. कभी कभी खामोशी में खामोशी भी अच्छी लगती हैं ...सादर

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  55. सचमुच ख़ामोशी का ए लंबा सफर होता है!! :)

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  56. वक्त के साथ उतर जाता है
    चुप होठों के पीछे छुपे बेताब शब्दों का सैलाब
    छोड़ जाता है अपने पीछे
    कभी न खत्म होने वाला सन्नाटा .....

    सत्य यही है....
    बेहतरीन रचना...
    सादर.

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  57. और कितनी छोटी है जिंदगी की कशमकश

    वक्त के साथ उतर जाता है
    चुप होठों के पीछे छुपे बेताब शब्दों का सैलाब
    छोड़ जाता है अपने पीछे
    कभी न खत्म होने वाला सन्नाटा

    ऐसे में कभी कभी उम्र भर का सफर काफी नहीं होता
    खामोशी को ज़ुबान देने में.....
    sajjan jee

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  63. बहुत शानदार रचना |


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  64. आपकी अभिव्यक्ति और शब्द विन्याश लाजवाब है.
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  65. आपकी हर रचना हमें खामोश कर देती है.... क्या कहें...कुछ सूझता ही नहीं...! बोले तो... निःशब्द... जो खुद में बहुत कुछ समेटे हुए है...
    ~सादर!!!

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आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है