स्वप्न मेरे: चाहत

रविवार, 7 फ़रवरी 2010

चाहत

चाहत
इक मधुर एहसास
पाने की नही
मुक्ति की प्यास

स्वयं को सुनाई देता
मौन स्पंदन
सीमाओं में बँधा
मुक्त बंधन

अनंत संवाद
प्रकृति से छलकता
विमुक्त आह्लाद
श्रिष्टी में गूँजता
अनहद नाद
अंतस से निकला
शाश्वत राग

अर्थ से परे
अभिव्यक्ति से आगे

क्या संभव है शब्दों में
प्रेम समेट पाना

क्या संभव है प्रेम को
भाषा में व्यक्त कर पाना

क्या संभव है अभिव्यक्ति को
सही शब्द दे पाना

क्या संभव है
चाहत के विस्त्रत आकाश को
शब्दों में बाँध पाना

45 टिप्‍पणियां:

  1. sach kah rahe hain.........prem ko shabdon mein bandha hi nhi ja sakta ------jo shashwat hai, chirantan hai wo shabdon mein kaise bandhega wo to sirf mehsoos kiya ja sakta hai , usmein dooba ja sakta hai aur usi mein khud ko paya ja sakta hai.

    जवाब देंहटाएं
  2. kahana to chaah rahaa tha....magar kah pana sambhav nahin ho paa raha.. bas itna hi ki bhaav-vihval ho gaya aapko padhkar....!!

    जवाब देंहटाएं
  3. अभिव्यक्ति के लिए सही शब्दों का चुनाव बहुत कठिन होता है....बहुत गहरे भाव लिए है आपकी ये रचना....बहुत खूब.....बधाई

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत ही सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ आपने शानदार रचना लिखा है जो काबिले तारीफ़ है!

    जवाब देंहटाएं
  5. अनंत संवाद
    प्रकृति से छलकता
    विमुक्त आह्लाद
    श्रिष्टी में गूँजता
    अनहद नाद
    अंतस से निकला
    शाश्वत राग
    Digambar ji,
    bahut hee sundar aur bhavpoorna kavita----man ko chhoone valee.
    Poonam

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत गहनतम भावाभिव्यक्ति, शुभकामनाएं.

    रामराम.

    जवाब देंहटाएं
  7. प्यार के प्रति आपकी आपकी अभिव्यक्ति में आपका
    अलग ही रूप दिखाई दिया!
    विचारों से ओत-प्रोत सुन्दर रचना के लिए बधाई!

    जवाब देंहटाएं
  8. क्या संभव है प्रेम को
    भाषा में व्यक्त कर पाना

    क्या संभव है अभिव्यक्ति को
    सही शब्द दे पाना

    क्या संभव है
    चाहत के विस्त्रत आकाश को
    शब्दों में बाँध पाना

    शायद नहीं, बहुत सुन्दर नाशवा जी

    जवाब देंहटाएं
  9. चाहत
    इक मधुर एहसास
    पाने की नही
    मुक्ति की प्यास
    chaahat jab mukti ki ho to waah kyaa baat he...kintu hamesha hota yah he ki chaaht mukti ki pyaas nahi ban paati..chaaht utrottar badhti rahti he aour baandhe rakhati he..mukti ki pyaas ban jaane vaali chaaht to moksh hi mana jaa saktaa he.
    स्वयं को सुनाई देता
    मौन स्पंदन
    सीमाओं में बँधा
    मुक्त बंधन..
    ynha bhi nasavaji, virodhabhaas lagtaa he kitu aapke marm ko samjhte hue..सीमाओं में बँधा
    मुक्त बंधन...bhi chahat ka roop ho saktaa he kitu mujhe lagtaa he ki jo bandha huaa he vo mukt kese? fir mukt kaa bhi bandhan???

    अनंत संवाद
    प्रकृति से छलकता
    विमुक्त आह्लाद
    श्रिष्टी में गूँजता
    अनहद नाद
    अंतस से निकला
    शाश्वत राग
    waaah yah ati sundar likhaa he..
    अर्थ से परे
    अभिव्यक्ति से आगे

    क्या संभव है शब्दों में
    प्रेम समेट पाना ..sach me sambhav nahi..aur in panktiyo me upar ka virodhabhaas bhi lupt ho jataa he.
    क्या संभव है प्रेम को
    भाषा में व्यक्त कर पाना

    क्या संभव है अभिव्यक्ति को
    सही शब्द दे पाना

    क्या संभव है
    चाहत के विस्त्रत आकाश को
    शब्दों में बाँध पाना
    sachmuch sambhav nahi////

    जवाब देंहटाएं
  10. चाहत
    इक मधुर एहसास
    पाने की नही
    मुक्ति की प्यास

    स्वयं को सुनाई देता
    मौन स्पंदन
    सीमाओं में बँधा
    मुक्त बंधन

    अनंत संवाद
    प्रकृति से छलकता
    विमुक्त आह्लाद
    श्रिष्टी में गूँजता
    अनहद नाद
    अंतस से निकला
    शाश्वत राग
    phir bhi aapne prem ki bahut sunder abhivyakti ki hai.bahut anubhav se hi hriday se nikal sakte hain aise shabd aur itni satya/shiv/sunder abhivyakti. aapko sampoorn hriday se badhaai.

    जवाब देंहटाएं
  11. क्या संभव है शब्दों में
    प्रेम समेट पाना

    ati sundar .prem ko abhivykt karne ke liye khan shbdo ki jrurat hai ?vo to maoun me hi mykhar hai .
    aur schmuch shbdo me kya bandh skte hai?
    ye sb kuchh to ahsaso ki prtiti hai

    जवाब देंहटाएं
  12. sundar prastuti ke liye abhinandan!

    जवाब देंहटाएं
  13. दिल की बात कही है आपने. अहसास को शब्द देना ही एक कलमकार की कोशिश होती है. प्रेम तो बस प्रेम है... अपरिभाषित.

    वैसे हमारी कोशिश होती है की हम आपके शब्दों के माध्यम से आपके अहसास को समझे... जो सुख आपसे मिल रहा है, अब इसको अभिव्यक्त करने के लिए मेरे पास भी शब्द नहीं है.

    बस बने रहिये... :) :)

    जवाब देंहटाएं
  14. नासवा जी
    बहुत सुन्दर रचना
    क्या संभव है प्रेम को
    भाषा में व्यक्त कर पाना
    प्रेम को भाषा से व्यक्त करपाना कदापि संभव नहीं है |
    आभार...........

    जवाब देंहटाएं
  15. नहीं संभव है भाई... कदापि नहीं ...

    जवाब देंहटाएं
  16. संभव असंभव की यह प्रस्‍तुति सचमुच सत्‍यता के बेहद निकट, बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

    जवाब देंहटाएं
  17. sach kaha abhivyakti ko shabd de pana mumkin hinai namumkin hai..
    bahut sunder rachna

    जवाब देंहटाएं
  18. चाहत
    इक मधुर एहसास
    पाने की नही
    मुक्ति की प्यास

    स्वयं को सुनाई देता
    मौन स्पंदन
    सीमाओं में बँधा
    मुक्त बंधन

    अनंत संवाद
    प्रकृति से छलकता
    विमुक्त आह्लाद
    श्रिष्टी में गूँजता
    अनहद नाद
    अंतस से निकला
    शाश्वत राग

    अर्थ से परे
    अभिव्यक्ति से आगे

    क्या संभव है शब्दों में
    प्रेम समेट पाना

    क्या संभव है प्रेम को
    भाषा में व्यक्त कर पाना

    क्या संभव है अभिव्यक्ति को
    सही शब्द दे पाना

    क्या संभव है
    चाहत के विस्त्रत आकाश को
    शब्दों में बाँध पाना
    mujhe poori rachna bahut hi achchhi lagi ,sabhi bhav man ko chhoo liye ,kah nahi pa rahi aur kuchh .

    जवाब देंहटाएं
  19. कभी कभी प्रेम की अभिव्यक्ति करने में पूरी उम्र गुजर जाती है।
    सच , बहुत मुश्किल है भाषा में व्यक्त कर पाना।
    सुन्दर प्रस्तुति।

    जवाब देंहटाएं
  20. चाहत
    इक मधुर एहसास
    ...हाँ, चाहत को शब्द दे पाना असंभव सा है ...मगर आपने अच्छा प्रयास किया..वाह!

    जवाब देंहटाएं
  21. adbhut!!

    bahut hi sundar rachnaa...
    **sach mein sambhav nahin hai...prem ko shbdon mein purn abhivyakt kar pana...

    **sundar shabd snayojan..gahan bhaav...!

    जवाब देंहटाएं
  22. नही दिगम्बर जी प्रेम को शब्दो मे समेट पाना कदापि सम्भव नही है .

    यह तो उन्मुक्त है
    आप्की कवित की तरह

    सत्या

    जवाब देंहटाएं
  23. दिगबंर जी .... मेरे ब्ल़ॉग पर आने के लिए आपका शुक्रगुजार हुं......शब्दों और भावों का ऐसा मेल .... शब्दों के बढ़िया चितेरे हैं आप..
    मुकम्मल कविता तो अद्भभुत है ही...हर टुकड़ा अपने में कई-कई बातें कहता है...

    स्वयं को सुनाई देता
    मौन स्पंदन
    अपने को कितनी शांती से सुनने की बात ...
    अनहद नाद
    अंतस से निकला
    शाश्वत राग
    ..मन शांत हो तो . अनहद अनहद....

    और प्रेम...ढ़ाई आखर कोई समझ पाया है..
    ....कई शब्द

    जवाब देंहटाएं
  24. कभी कभी प्रेम की अभिव्यक्ति करने में पूरी उम्र गुजर जाती है।

    जवाब देंहटाएं
  25. हर रंग को आपने बहुत ही सुन्‍दर शब्‍दों में पिरोया है, बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

    जवाब देंहटाएं
  26. शायद नही, पर आप काफी करीब पहुंचे हैं ।
    अनंत संवाद
    प्रकृति से छलकता
    विमुक्त आह्लाद
    श्रिष्टी में गूँजता
    अनहद नाद
    अंतस से निकला
    शाश्वत राग

    जवाब देंहटाएं
  27. Bahut sunda bhavpurn sawal karti aapki kavita bahut achhi lagi. Subkuch sabdon mein badhna sambhv kahan.....
    Badhai

    जवाब देंहटाएं
  28. अहा ! फूल जैसी महक है इस रचना में और अंतरिक्ष जैसी विरॉटता। जो पूरा नहीं दिखकर भी हमेशा पूरा ही दिखता है।
    जी नहीं, अनुभूतियों की सौ प्रतिशत अभिव्यक्ति संभव नहीं है । शब्द बहुत कम पड़ जाते हैं। चित्र बनते रहता है पर शब्द घटते जाते हैं। फिर भी जो सुखनवर है, वे कहां मानते हैं। शब्द-संसाधन की कमी के बावजूद अभिव्यक्त करने वाले ही तो सच में कवि हैं।

    जवाब देंहटाएं
  29. वाह एक अलग और बढ़िया विधा में एक सुंदर कविता ..पढ़ कर अच्छा लगा वैसे एक बात है कि आप ग़ज़ल लिखिए या गीत सब में लाज़वाब हैं...बधाई

    जवाब देंहटाएं
  30. गहरे भावर्थ लिये रचना...

    मेरे शब्दों में

    मेरी पलको के जुगनू हैं अलग
    मेरी आंखों के आंसूं हैं अलग
    होगी बरसात जब भी कभी
    होगी हर किसी बात से अलग

    जवाब देंहटाएं
  31. after a long time icould cnnect to internet.the bad line kept me awayfrom friends.but it was joy to read your "chahat".

    जवाब देंहटाएं
  32. स्वयं को सुनाई देता
    मौन स्पंदन
    सीमाओं में बँधा
    मुक्त बंधन

    ek dam sahi baat kahi aapne
    khud ko maun poornteh sunayi deta hai.


    क्या संभव है शब्दों में
    प्रेम समेट पाना
    -yahi to mushkil he mere saath bhi.. true very true.

    क्या संभव है प्रेम को
    भाषा में व्यक्त कर पाना

    sambhav hua hoga shayed mahaan kaviyo k liye...jo itna vistrit to kar paye pyar ko shabdo me..

    क्या संभव है अभिव्यक्ति को
    सही शब्द दे पाना
    --such me ek kathin kaam...jaise me abhi nahi de pa rahi hu sahi shabd aapke lekhan ki tareef me.

    जवाब देंहटाएं
  33. स्वयं को सुनाई देता
    मौन स्पंदन
    सीमाओं में बँधा
    मुक्त बंधन
    क्या बात है दिगम्बर जी.

    जवाब देंहटाएं
  34. अनंत संवाद
    प्रकृति से छलकता
    विमुक्त आह्लाद
    श्रिष्टी में गूँजता
    अनहद नाद
    अंतस से निकला
    शाश्वत राग
    क्या अद्भुत और सार्थक परिभाषाएँ दी है आपने चाह्त की.
    सुन्दर

    जवाब देंहटाएं
  35. tere chehrey mein talaashten hain hum prem ki paribhasha,bus tera hona hi maatr pyar ki amad hai!

    bahut umda likha hai apne...meri rachna apko pasand ayi...main dhanya ho gaya..!i m a big fan of ur writing!

    जवाब देंहटाएं
  36. बहुत प्रभावशाली रचना. सुंदर दिल को छुते शब्द और प्रेम को परिभाषित न कर पाने की व्यथा

    जवाब देंहटाएं
  37. शायद शब्‍दों के पार उस निशब्‍द की ध्‍वनि कभी सुनाई दे जाए जीवन में। फिर शब्‍द जीवत हो जाएगे। अभी तो तेर रहे तल पर एक भटकती लकडी की तरह।
    प्रेम।
    मनसा आनंद मानस

    जवाब देंहटाएं
  38. क्या संभव है शब्दों में
    प्रेम समेट पाना

    क्या संभव है प्रेम को
    भाषा में व्यक्त कर पाना

    क्या संभव है अभिव्यक्ति को
    सही शब्द दे पाना .....

    (Siddhartha)novel mein hermann hesse ne is cheez ko bahut hi achhe se samjhaya hai - ki shabd kabhi bhi pura sach bayan nahi kar sakte .. shabdo me kahi baat bhi kahin na kahin adhuri reh jaati hai !!!
    bahut achhi kavita lagi :)

    जवाब देंहटाएं
  39. हीर जी होली मुबारक ....28 तारीख की बात ब्लॉग पर क्लीयर कर दी है...

    जवाब देंहटाएं

आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है