स्वप्न मेरे: अंधेरा ...

मंगलवार, 19 जून 2012

अंधेरा ...


ठीक उसी वक्त 
जब अंधेरा घर वापसी की तैयारी करता है 
उजाला बादलों के पीछे से अपने आने की खबर देने लगता है     
भूलने लगते हैं सब अंधेरे का अस्तित्व  
हालांकि सच तो ये है 
दिन का उजाला मन के अंधेरे को ढांप नहीं पाता 

उस दिन मझे भी ऐसा महसूस हुवा था 
तुम चली गई हमेशा हमेशा के लिए उस रौशनी के साथ 
बिना सोचे समझे की रौशनी का अस्तित्व केवल अंधेरे से है 
एक ही सिक्के के दो पहलू 

मैं तो उसी लम्हे से शैतान बन गया था 
अंधेरे के साथ आता रहा, जाता रहा  
और अब तो कभी कभी 
रौशनी के आने पे भी पसरा रहता हूँ 
कभी पेड़ की छाया में 
या कभी गुनाह की आड़ में ... 

सच बताना क्या तुम मुझे अभी भी प्यार नहीं करतीं ...?   
अंधेरे से तो तुम्हे भी प्यार था बचपन से ...? 

80 टिप्‍पणियां:

  1. रौशनी का होना ही तो अँधेरा है..........
    प्यार करती होगी ...बस रूठी है अभी.....
    :-)
    सादर

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  2. ओह..चकित सी कविता..रौशनी और अँधेरा एक दुसरे के पूरक ही तो हैं.

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  3. एक के बिना दुसरे का अस्तित्व कहाँ

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  4. फिर से चर्चा मंच पर, रविकर का उत्साह |

    साजे सुन्दर लिंक सब, बैठ ताकता राह ||

    --

    बुधवारीय चर्चा मंच

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  5. ...अगर अँधेरे में समा गई तो...अधेरें से बाहर भी निकल आएगी!...बस थोडासा इंतज़ार और...

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  6. मैं तो उसी लम्हे से शैतान बन गया था
    अंधेरे के साथ आता रहा, जाता रहा
    और अब तो कभी कभी
    रौशनी के आने पे भी पसरा रहता हूँ
    कभी पेड़ की छाया में
    या कभी गुनाह की आड़ में ...


    बहुत खूबसूरत नज़्म...अंतर्मन को उद्देलित करने वाली...

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  7. अन्धेरा और उजाला एक दूसरे के पूरक होते है,
    बहुत बेहतरीन मनोभाव की सुंदर प्रस्तुति ,,,,,

    RECENT POST ,,,,,पर याद छोड़ जायेगें,,,,,

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  8. मन के गहन भावों की अभिव्यक्ति ....

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  9. ...अँधेरा बन जाओगे तो रोशनी ज़रूर आएगी मिलने |

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  10. कवि की कल्पना शक्ति का अच्छा प्रदर्शन .

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  11. मैं तो उसी लम्हे से शैतान बन गया था
    अंधेरे के साथ आता रहा, जाता रहा
    और अब तो कभी कभी
    रौशनी के आने पे भी पसरा रहता हूँ
    कभी पेड़ की छाया में
    या कभी गुनाह की आड़ में ...

    बहुत ही सुन्दर ।

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  12. होती है आराधना
    प्रकाश की भी
    अंधेरे में ही!

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  13. एक बेहद गहन अभिव्यक्ति।

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  14. अंधेरे के साथ आता रहा, जाता रहा
    और अब तो कभी कभी
    रौशनी के आने पे भी पसरा रहता हूँ
    कभी पेड़ की छाया में
    या कभी गुनाह की आड़ में ...
    बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति .. आभार

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  15. सुंदर रचना बेहतरीन अभिव्यक्ति ....

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  16. हालांकि सच तो ये है
    दिन का उजाला मन के अंधेरे को ढांप नहीं पाता
    kyunki
    yahan ka andhera dikhayi nahin deta....

    अंधेरे से तो तुम्हे भी प्यार था बचपन से ...?
    sahi kaha....

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  17. बिना सोचे समझे की रौशनी का अस्तित्व केवल अंधेरे से है
    एक ही सिक्के के दो पहलू.

    बुराई है तो अच्छाई है. आपका नजरिया बहुत महत्वपूर्ण है. सुंदर रचना.

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  18. अँधेरा और रोशनी...एक के बिना दूसरा नहीं...
    a poem of high quality !!!

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  19. अंधेरे के साथ आता रहा, जाता रहा
    और अब तो कभी कभी
    रौशनी के आने पे भी पसरा रहता हूँ
    कभी पेड़ की छाया में
    या कभी गुनाह की आड़ में ...
    ....कितनी बारीकी से देखा गया, बताया गया सच.....आपका आभार इस रचना के लिए!

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  20. वाह क्या बात है ...बहुत बढ़िया ....अँधेरा और रौशनी ...एक अलग अर्थ दे गयी यह रचना ..बहुत पसदं आई

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  21. एक दूजे से जुड़े गहरे भाव...... बेहतरीन

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  22. अँधेरों के साये में सब सम हो जाता है..

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  23. बचपन बहुत पीछे छुट गया ....अब तो सत्य के धरातल पर लौट आईये ....

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  24. बड़ा दुविधाजनक प्रश्न है। पर हां अंधेरा उजाला के आने की पूर्व सूचना भी हो सकता है।

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  25. सच बताना क्या तुम मुझे अभी भी प्यार नहीं करतीं ...?
    यह जवाब मिल जाये तो कितनो का भला न हो जाय ?

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  26. जिसे हम अंधेरा समझते हैं ...वो अंधेरा है ही नहीं ....सूरज तब भी साथ होता है हमारे ....चांद की शीतल किरणों के रूप मे .......जीवन की अति से हमें निजात दिलाने ...सूरज और चांद दोनो चाहिये ...समरूप जीवन के लिये ....!!
    बहुत सुंदर रचना ...एक सोच दे गयी ...

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  27. सच बताना क्या तुम मुझे अभी भी प्यार नहीं करतीं ...?
    अंधेरे से तो तुम्हे भी प्यार था बचपन से ...? बेजोड़ पंक्तियाँ

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  28. और अब तो कभी कभी
    रौशनी के आने पे भी पसरा रहता हूँ
    कभी पेड़ की छाया में
    या कभी गुनाह की आड़ में .

    बहुत बढ़िया

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  29. क्या बात है नासवा साहब छा गए हैं हर अश आर ,उम्दा ग़ज़ल उम्दा भाव अर्थ उम्दा . अच्छी प्रस्तुति .कृपया यहाँ भी पधारें -


    बुधवार, 20 जून 2012
    क्या गड़बड़ है साहब चीनी में
    क्या गड़बड़ है साहब चीनी में
    http://veerubhai1947.blogspot.in/

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  30. अँधेरा और उजाला एक दूसरे के पूरक हैं..एक जाता है तो दूसरा आता है.. ..सुन्दर रचना..

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  31. अँधेरे के बिना उजाले का अस्तित्व कहाँ...बहुत सुन्दर रचना

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  32. बहुत सुन्दर रचना .....अँधेरे उजाले दोनों कही अपना वजूद है ....हर अँधेरे में रौशनी कीआहट होती है

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  33. अँधेरा और रौशनी एक दुसरे के पूरक भी तो है, शायद वो आपसे भी यही प्रश्न पूछना कहती हो . एक कदम तुम भी चलो .

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  34. उजाला बादलों के पीछे से अपने आने की खबर देने लगता है सच मे ये तो हर कोई महसूस करता है ... बहुत सुन्दर रचना !

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  35. दिन का उजाला मन के अंधेरे को ढांप नहीं पाता ....


    सच है

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  36. हालांकि सच तो ये है
    दिन का उजाला मन के अंधेरे को ढांप नहीं पाता
    Kitna sahee kaha aapne!

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  37. नासवा साहब पहली मर्तबा जब अमरीका गए २००६ में तब पहली मर्तबा जाना चीनी हमारे खाद्य से पोषक तत्व नष्ट कर देती है .यकीन मानिए हमने दो बरसों तक चीनी को हाथ नहीं लगाया .बाद इसके गुड की शरण ली .गुड से तमाम खनिज मिल जाते हैं .छोटी सी डली लो फीकी चाय की चुस्की के साथ ,अलग मजा आयेगा .इस फार्मूले पे चले ६८-६९किलोग्राम भार तौल बना रहा .सलाद भी तब सतरंगी खाते थे बेल पेपर (लाल ,पीली शिमला मिर्च ),चुकंदर ,नारंगी गाज़र ,मूली ,टमाटर ,सलाद पत्ता लेटस आदि आदि .बाद इसके केज्युअल हो गए फिर हो गए ब्लोगिया ,मोडरेट ड्रिंक्स भी जीवन शैली में है .अब जब परसों चौथियो मर्तबा अमरीका प्रवास पर जा रहें हैं हमारी तौल ८० के पार है .काम की बात है गुड .ड्रिंक्स में एक लाईट पेग से ज्यादा नहीं (३० ml ) . .कृपया यहाँ भी पधारें -


    ram ram bhai
    बुधवार, 20 जून 2012
    ये है मेरा इंडिया
    ये है मेरा इंडिया

    http://veerubhai1947.blogspot.in/

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  38. ठीक उसी वक्त
    जब अंधेरा घर वापसी की तैयारी करता है
    उजाला बादलों के पीछे से अपने आने की खबर देने लगता है
    भूलने लगते हैं सब अंधेरे का अस्तित्व

    दुःख लिए होता है सुख की परछाईं ,नासवा साहब गुड एक सुपाच्य कोम्प्लेक्स कार्बो -हाई -ड्रेट है सहज पचता है और आहिस्ता आहिस्ता ज़ज्ब होता है .ऊर्जा धीरे धीरे रिसती है गुड खाने के बाद .चीनी खाने के बाद एक दम से सैलाब आजाता है केलोरीज़ का , सीधे दाखिल होती है खून, में वहां से चर्बी में .गुड में खनिज लवण रहतें हैं .

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  39. हाँ भाई साहब हमारी फ्लाईट लुफ्तान्षा फ्रेंकफर्ट होकर देत्रोइत के लिए है .आपकी सदाशयता अच्छी लगी .हेव ग्रेट टाइम्स .

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  40. रौशनी के आने पे भी पसरा रहता हूँ
    कभी पेड़ की छाया में
    या कभी गुनाह की आड़ में ...

    गहरी अभिव्यक्ति ..

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  41. andhera nahi hoga to raushni ka mehatv kahan rah jayega ?

    sunder bimbo se apne ehsaaso ko shabd diye hain.

    samvedansheel rachna.

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  42. ऐसा लगा मानो अँधेरा ही शाश्वत है...उत्तम रचना.....

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  43. अंधेरे के साथ उजाला भी साथ आता है,संसार,विरोधाभासों से बना है,
    भाअवपूर्ण रचना.

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  44. अंधेरे के साथ उजाला भी साथ आता है,संसार,विरोधाभासों से बना है,
    भाअवपूर्ण रचना.

    जवाब देंहटाएं
  45. अंधेरे के साथ उजाला भी साथ आता है,संसार,विरोधाभासों से बना है,
    भाअवपूर्ण रचना.

    जवाब देंहटाएं
  46. अंधेरे के साथ उजाला भी साथ आता है,संसार,विरोधाभासों से बना है,
    भाअवपूर्ण रचना.

    जवाब देंहटाएं
  47. अंधेरे के साथ उजाला भी साथ आता है,संसार,विरोधाभासों से बना है,
    भाअवपूर्ण रचना.

    जवाब देंहटाएं
  48. अंधेरे के साथ उजाला भी साथ आता है,संसार,विरोधाभासों से बना है,
    भाअवपूर्ण रचना.

    जवाब देंहटाएं
  49. अंधेरे के साथ उजाला भी साथ आता है,संसार,विरोधाभासों से बना है,
    भाअवपूर्ण रचना.

    जवाब देंहटाएं
  50. अंधेरे के साथ उजाला भी साथ आता है,संसार,विरोधाभासों से बना है,
    भाअवपूर्ण रचना.

    जवाब देंहटाएं
  51. अंधेरे के साथ उजाला भी साथ आता है,संसार,विरोधाभासों से बना है,
    भाअवपूर्ण रचना.

    जवाब देंहटाएं
  52. अंधेरे के साथ उजाला भी साथ आता है,संसार,विरोधाभासों से बना है,
    भाअवपूर्ण रचना.

    जवाब देंहटाएं
  53. अंधेरे के साथ उजाला भी साथ आता है,संसार,विरोधाभासों से बना है,
    भाअवपूर्ण रचना.

    जवाब देंहटाएं
  54. अंधेरे के साथ उजाला भी साथ आता है,संसार,विरोधाभासों से बना है,
    भाअवपूर्ण रचना.

    जवाब देंहटाएं
  55. जैसे दुःख की अनुभूति के बिना सुख को भरपूर जिया नहीं जा सकता , शायद ऐसा ही अँधेरे और प्रकाश का मेल हो ...
    तुम्हे भी तो प्यार था अँधेरे से बचपन से ....प्रश्न सिहरा देता है !!

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  56. andhera bahut logo ko pasand hota hai. mujhe bhi. aapki yah rachna bahut achchi lagi

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  57. HRIDAYSPARSHEE KAVITA KE LIYE AAPKO BADHAAEE AUR SHUBH KAMNA .

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  58. एक सिक्के दो पहलू हैं, बहुत ही नायाब एवम प्रभावी रचना, शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  59. रोशनी की अहमियत तो अँधेरे के परिप्रेक्ष्य में ही है.
    बहुत खूब

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  60. उस दिन मझे भी ऐसा महसूस हुवा था
    तुम चली गई हमेशा हमेशा के लिए उस रौशनी के साथ
    बिना सोचे समझे की रौशनी का अस्तित्व केवल अंधेरे से है
    एक ही सिक्के के दो पहलू----बढ़िया बिम्ब समेटे है यह प्रस्तुति ...कृपया 'उस दिन मुझे एहसास हुआ था 'कर लें 'मझे 'और 'हुवा ' था ,स्गुद्ध कर लें .अँधेरे उजाले का खेल ही ज़िन्दगी है कभी बाज़ी इधर तो कभी उधर हैं दोनों एक दूसरे के पूरक और एक दूसरे के आवेग को बढाने वाले ... वीरुभाई ,४३,३०९ ,सिल्वर वुड ड्राइव ,कैंटन ,मिशिगन -४८ १८८ ,यू एस ए .

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  61. तो उसी लम्हे से शैतान बन गया था
    अंधेरे के साथ आता रहा, जाता रहा
    ............
    कई बार नहीं समझ आता की क्या कहूँ ...मौन हो कर सोचता हु ... अंधरे उजाले मन के अक्सर मौका मिलते ही गहरे लेते हैं...है न... ?

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  62. उस दिन मझे भी ऐसा महसूस हुवा था
    तुम चली गई हमेशा हमेशा के लिए उस रौशनी के साथ
    बिना सोचे समझे की रौशनी का अस्तित्व केवल अंधेरे से है
    एक ही सिक्के के दो पहलू

    Bahut sahi kaha hai.

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  63. zindagi me andhera bahut hai ...kuch ujaala hi jiwan darshan hai....

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  64. बहुत उम्दा अभिव्यक्ति!

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  65. सच बताना क्या तुम मुझे अभी भी प्यार नहीं करतीं ...?
    अंधेरे से तो तुम्हे भी प्यार था बचपन से ...?

    देवदास की याद दिलाती कविता.

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  66. सच बताना क्या तुम मुझे अभी भी प्यार नहीं करतीं ...?
    अंधेरे से तो तुम्हे भी प्यार था बचपन से ...?

    bahut hi sunder dil ko chhooti rachna
    shubhkamnayen

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आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है