स्वप्न मेरे: शहर में क्यों चराग़ों की मरम्मत हो रही है ...

सोमवार, 9 जून 2014

शहर में क्यों चराग़ों की मरम्मत हो रही है ...

अँधेरों को यही एहसासे-ज़िल्लत हो रही है
शहर में क्यों चराग़ों की मरम्मत हो रही है

कभी शर्मा के छुप जाना कभी हौले से छूना
न ना ना ना यकीनन ही मुहब्बत हो रही है

मेरी आवारगी की गुफ्तगू में नाम तेरा
अदब से ही लिया था पर मज़म्मत हो रही है

चुना है रास्ता कैसा, पड़ी है क्या किसी को
बुलंदी पर जो हैं उनकी ही इज्ज़त हो रही है

यहाँ पर कहकहों का शोर है लेकिन अदब से
ये कैसा घर है पहरे में मसर्रत हो रही है

उकूबत है हिमाकत या बगावत है दिये की
हवा के सामने आने की ज़ुर्रत हो रही है

झुकी पलकें, खुले गेसू, दुपट्टा आसमानी
ये दुनिया तो तेरे आने से जन्नत हो रही है


48 टिप्‍पणियां:

  1. अमां मियाँ मज़ा आ गया...क्या शेर दागे हैं हुज़ूर...वाह भाई वाह...

    जवाब देंहटाएं
  2. वाह .. बहुत खूबसूरत गज़ल

    उकूबत है हिमाकत या बगावत है दिये की
    हवा के सामने आने की ज़ुर्रत हो रही है

    बहुत खूबसूरती से लिखा है .

    जवाब देंहटाएं
  3. हर एक पंक्तियाँ अद्भुत सुन्दर है
    बहुत सुन्दर नासवा जी...मन खुश हो गया पढ़ कर..!!

    जवाब देंहटाएं
  4. उकूबत है हिमाकत या बगावत है दिये की
    हवा के सामने आने की ज़ुर्रत हो रही है

    बहुत उंउम्दा शेर !

    जवाब देंहटाएं
  5. वाह !
    उम्दा गजल
    खूबसूरत अभिव्यक्ति

    जवाब देंहटाएं
  6. आपकी लिखी रचना मंगलवार 10 जून 2014 को लिंक की जाएगी...............
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
  7. चुना है रास्ता कैसा, पड़ी है क्या किसी को
    बुलंदी पर जो हैं उनकी ही इज्ज़त हो रही है............

    झुकी पलकें, खुले गेसू, दुपट्टा आसमानी
    ये दुनिया तो तेरे आने से जन्नत हो रही है............ये शेर तो गजब के हैं।


    बाकी शेर भी अच्‍छे होंगे। पर उनमें उर्दू के शब्‍द आए, जो समझ नहीं अाए।

    जवाब देंहटाएं
  8. वाह..... क्या अदा से जुर्रत पेश कर रहे हैं...... जन्नत की तो बाद में देखेंगे नासवा साहब..

    जवाब देंहटाएं
  9. कभी शर्मा के छुप जाना कभी हौले से छूना
    न ना ना ना यकीनन ही मुहब्बत हो रही है

    बहुत सुन्दर नासवा जी

    जवाब देंहटाएं
  10. बहुत ताज़गी भरे शेर हैं.. वाकई।

    जवाब देंहटाएं
  11. मोहब्बत हर फ़िक्र से आज़ाद है. बहुत सुंदर रचना.

    जवाब देंहटाएं
  12. बहुत बढ़िया
    बधाइयां आदरणीय-

    जवाब देंहटाएं
  13. यहाँ पर कहकहों का शोर है लेकिन अदब से
    ये कैसा घर है पहरे में मसर्रत हो रही है
    ..बहुत सुन्दर उम्दा

    जवाब देंहटाएं
  14. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन पेड़ों के दर्द को क्यों नही समझते हम - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    जवाब देंहटाएं
  15. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस' प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (10-06-2014) को "समीक्षा केवल एक लिंक की.." (चर्चा मंच-1639) पर भी होगी!
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

    जवाब देंहटाएं
  16. हर एक शेर ला -ज़वाब ,ख़ास ग़ज़ल ज़नाब दिगंबर नासवा साहब की।

    जवाब देंहटाएं
  17. क्या बात है दिल बाग़ बाग़ हो गया !

    जवाब देंहटाएं
  18. भई वाह!!!!! क्या खूब लिखा है. हर शेर वज़नी है.

    जवाब देंहटाएं
  19. वाह !!हर एक शेर बेहतरीन ....

    जवाब देंहटाएं
  20. अँधेरों को यही एहसासे-ज़िल्लत हो रही है
    शहर में क्यों चराग़ों की मरम्मत हो रही है
    ... आधुनिक परिपेक्ष्य में पूर्णतया सार्थक होता लाजवाब शे'र , ग़ज़ल का हरेक अश'आर बेजोड़ लगा!

    जवाब देंहटाएं
  21. यक़ीनन हर एक शेर उम्दा .. वाह!

    जवाब देंहटाएं
  22. वाह! बहुत उम्दा ग़ज़ल...हरेक शेर बहुत ख़ूबसूरत...

    जवाब देंहटाएं
  23. ज़बरदस्त ग़ज़लें आ रही हैं आपकी कलम से. यह सिलसिला चलता रहे.

    जवाब देंहटाएं
  24. अँधेरों को यही एहसासे-ज़िल्लत हो रही है
    शहर में क्यों चराग़ों की मरम्मत हो रही है

    चुना है रास्ता कैसा, पड़ी है क्या किसी को
    बुलंदी पर जो हैं उनकी ही इज्ज़त हो रही है

    उकूबत है हिमाकत या बगावत है दिये की
    हवा के सामने आने की ज़ुर्रत हो रही है

    एक से बढ़कर एक शेर आदरणीय बहुत शानदार ग़ज़ल

    जवाब देंहटाएं
  25. खूबसूरत अशआर से सजी लाजवाब ग़ज़ल. कमाल के शेर हैं. दाद निकलती है हर शेर पर. कुछ तो व्यवस्था और हालात पर ज़बर्दस्त तंज़ करते नज़र आ रहे हैं. तहे दिल से मुबारकबाद.

    जवाब देंहटाएं
  26. बहुत सुंदर नासवा जी ! मंगलकामनाएं आपको !

    जवाब देंहटाएं
  27. सबसे पहले तो टिप्पणी फार्म वापस पाने की बधाई :-))

    इस ग़ज़ल के लिए खास दाद देना चाहूँगा | एक मुक़म्मल ग़ज़ल .....हर शेर उम्दा और कसा हुआ | बहुत ही बढ़िया लगी...वाह , वाह

    जवाब देंहटाएं
  28. uncle kaam se lautne k baad ki poori thakan hi maano gayab ho gayi ho is ghazal k padhne se. . maja aa gaya sir.! :)

    जवाब देंहटाएं
  29. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    जवाब देंहटाएं
  30. चुना है रास्ता कैसा, पड़ी है क्या किसी को
    बुलंदी पर जो हैं उनकी ही इज्ज़त हो रही है

    यहाँ पर कहकहों का शोर है लेकिन अदब से
    ये कैसा घर है पहरे में मसर्रत हो रही है

    एक एक अल्फ़ाज़ एक एक अशआर मोती जैसा

    जवाब देंहटाएं
  31. चुना है रास्ता कैसा, पड़ी है क्या किसी को
    बुलंदी पर जो हैं उनकी ही इज्ज़त हो रही है

    ...वाह...हरेक शेर दिल को छूता हुआ..बहुत उम्दा ग़ज़ल...

    जवाब देंहटाएं
  32. चुना है रास्ता कैसा, पड़ी है क्या किसी को
    बुलंदी पर जो हैं उनकी ही इज्ज़त हो रही है..

    bilkul steek panktiyaan... ati sunder

    जवाब देंहटाएं

  33. Türkiye'nin en güzel ve tarihi şehirlerinden biri olan https://bayanserik.space/, peribacaları ve doğal güzellikleriyle ünlüdür. Bu bölge, özellikle sıcak hava balonlarıyla yapılan turlar sayesinde ziyaretçilerine unutulmaz anlar yaşatır. Tarih boyunca birçok medeniyete ev sahipliği yapmış olan bu şehir, kültürel zenginlikleriyle de dikkat çeker. Gezginler, burada hem doğanın hem de tarihin tadını çıkarabilir. Eğer seyahat planlarınız arasında yer alıyorsa, mutlaka https://bayanserik.space/'i listenize eklemelisiniz.

    जवाब देंहटाएं

  34. § 202c StGB fordert bei Cyberangriffen klare Kommunikation und Dokumentation. Für Penetrationstester ist es wichtig, im Bericht präzise Scoping-Infos anzugeben, um den Auftrag genau zu definieren. Die Kundenkommunikation sollte verständlich sein, um Missverständnisse zu vermeiden. Bei der Weiterentwicklung im Bereich cybersecurity weiterbildung lernen Fachleute, wie sie Ergebnisse verständlich präsentieren. Ein strukturierter Report enthält immer eine Zusammenfassung der gefundenen Schwachstellen und Empfehlungen gemäß ISO 27001. Auf https://csvisor.de/ finden sich hilfreiche Hinweise zur optimalen Reporting-Praxis in der Weiterbildung für pentester. Das Scoping beeinflusst die Effizienz eines Tests maßgeblich und ist ein zentraler Bestandteil des Reportsprozesses. Klare Absprachen helfen dabei, den Erfolg einer cybersecurity weiterbildung nachhaltig zu sichern.

    जवाब देंहटाएं

आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है